Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari, शिक्षक पर शायरी

Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी :- गुरु का स्थान ईश्वर से ऊँचा माना गया है उनकी महिमा अपरम्पार कही गई हैं | क्योकि गुरु, शिक्षक या टीचर ही हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं संसार का ज्ञान कराते है हम क्या है हमारा अस्तित्व क्या है हमें क्या करना चाहिए इसका ज्ञान गुरु के बिना सम्भव नहीं हैं | इसलिए कभी भी हमे अपने गुरुजनों व शिक्षको का अपमान नहीं करना चाहिए | आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपके साथ

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Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी

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Guru Dukh Ka Sabse Saccha Sathi

Sukh Me To Sabhi Hote Hain

Ek Guru Ka Palla Pakde Rho

Dukh Me Akele Nahi Rahoge Kabhi

 


गुरु की महिमा का क्या मैं बखाना करू

गुरु ही है मेरा ईश्वर है इस सच को मैं स्वीकार करू

बिन गुरु जीवन में तम ही तम छाया है

गुरु हैं मेरा सूर्य जो सच्चे राह पर चलना सिखाया है

 


गुरु से ही सुरु है मेरी लिखावट लिखू

क्या उनके लिए मेरे गुरु ही है मेरी बनावट

 


रोशनी बनकर आए जो हमारी जिंदगी में

ऐसे गुरुओ को मैं प्रणाम करता हूँ

जमीन से आसमान तक पहुँचाने का रखते है जो हुनर

ऐसे शिक्षक को मैं दिल से सलाम करता हूँ

 Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी


Gumanami ke andhere mein tha pahachaan bana diya

Duniya ke gam se mujhe anajaan bana diya

Unki aisi kripa hui guru ne mujhe ek achchha insaan bana diya

 


मस्तिष्क का कोना-कोना ज्ञान से रिक्त था

हृदय का कतरा-कतरा भाव से रहित था

नमन कोटि-कोटि गुरुवर आपको

मुझे ज्ञान-भाव से युक्त कर सार्थक उत्पत्ति बनाया

 


जग अंधकार, आप मार्गदर्शक है

पथ भ्रमीत जीवन का आप पथ प्रदारसक है

अज्ञानी है ये मन, आप भंडार है ज्ञान का

ये जो मेरी पहचान है सब आप का बलिदान है गुरु जी

 


जुबां से हमेशा जिनकी प्यार पाया है

मेरी कामयाबी के पीछे हमेशा जिनका साया है

अल्फ़ाज़ों के अभाव में, नतमस्तक है मेरी कलम

ऐसे गुरुयों के आगे, जिन्होंने मेरा परिचय खुदा से कराया है

 


क्या दूँ गुरु-दक्षिणा, मन ही मन मैं सोचूं

चुका न पाऊं ऋण मैं तेरा

अगर जीवन भी अपना दे दूँ

 


उन मास्टरों को भी नमन जो हमें बातें

करने पर कूट देते थे लेकिन जब दो

कन्याएँ बातें करतीं तो बड़े प्यार से कहते

क्या बातें हो रही हैं? हमें भी तो बताओ

 

Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी


सब धरती कागज करूँ,लेखनी सब वनराज

सब सागर की मसी करूँ,गुरु गुण लिकयो न जाय

 


शिक्षक और अध्यापक के रूप में, गुरु पहले भगवान है हमारे

प्रणाम, प्रणिपात और आवंदन करते हैं हम सारे

पाकर आशीर्वाद गुरु द्रोण से, अर्जुन विश्व का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कहलाया था

देकर श्राप गुरु परशुराम ने कर्ण को, रणभूमि में उसके ज्ञान को भूलाया था

 


जिसे देता है हर व्यक्ति सम्मान, जो करता है वीरों का निर्माण

जो बनाता है इंसान को इंसान, ऐसे गुरु को कोटि – कोटि प्रणाम

 


गुरु ज्ञान की दीप की ज्योति से मन आलोकित कर देता है

विद्या का धन देकर जीवन सुख से भर देता है

प्रणाम गुरु को जो ज्ञान की खुशबू से जीवन भर देता है

 


हाथ पकड़ कर लिखना सिखाया अपने

फूलो में काटो मतलब सिखाया अपने

गिरे जब हम भी खुद से उठना सिखाया अपने

होता क्या जीवन शिक्षा के बिना ये सिखाया अपने

खुद 5 घण्टे खड़े रहकर हमे बिठाकर सिखाया अपने

कर देते गुस्सा जब कुछ न कर पाते हम

पर फिर अगले ही दिन पास बैठाकर हँसाया अपने

अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाया अपने

 


वाणी शीतल चन्द्रमा, मुख-मण्डल सूर्य समान

गुरु चरनन त्रिलोक है, गुरु अमृत की खान

मुझ पर मेरे गुरुओं का

प्यार और उनका आशीर्वाद यूँ ही उधार रहने दो

बड़ा हसीन है ये कर्ज़, मुझे कर्ज़दार रहने दो

 


जल जाता है वो दिए की तरह

कई जीवन रोशन कर जाता है

कुछ इसी तरह से हर गुरु

अपना फर्ज निभाता है

 


“गुरु” ने हमे कुछ इतना काबिल बना दिया

डांट लगाते लगाते आज हमे खुद को ही “गुरु” बना दिया

 


गुमनामी के अंधेरे में था, पहचान बना दिया

दुनिया के गम से मुझे, अनजान बना दिया

उनकी ऐसी कृपा हुई

गुरू ने मुझे एक अच्छा इंसान बना दिया

 


बिना गुरू नहीं होता जीवन साकार

सर पर होता जब गुरू का हाथ

तभी बनता जीवन का सही आकार

गुरू ही है सफल जीवन का आधार

 

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जीवन जितना सजता है माँ-बाप के प्यार से

उतना ही महकता है गुरु के आशीर्वाद से

 


माँ ने उँगली पकड़कर आँगन में दौड़़ाया

पिता ने दुनिया की राह पर चलना सिखाया

जग में सर्वोपरि स्थान गुरुवर आपको

मुझे जीवन-सार देकर एक व्यक्ति बनाया

 



निराशा में आशा की झलक दिखा दे

दुखों में खुशी की बौछार करा दे

दर्द पर ऐसा मरहम लगा दे

एक गुरु ही है जो भगवान से साक्षात्कार करा दे

 



ज्ञान देने वाले गुरू का बंदन है

उनके चरणों की धूल भी चंदन है

 


शिक्षा से बड़ा कोई वरदान नहीं है

गुरू का आशीर्वाद मिले इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं है

 


लक्ष्य प्राप्त कर सकू, आपने मुझे इस योग्य बनाया

जब महसूस किया मैंने हारा

आपका दिया ज्ञान बहुत काम आया

 


जीवन जितना सजता है माँ-बाप के प्यार से

उतना ही महकता है गुरू के आशीर्वाद से

 


धरती कहती है, नदियां कहती है

अंबर कहते बस यही तराना

गुरू आप ही वो पावन नूर है

जिनसे रौशन हुआ जमाना

 


हर काम आसान हो जाता है

जब सच्चे शिक्षक का सनिध्य मिलता है

फिर चाहे कितने ही आये जीवन में उतार-चढ़ाव

शिक्षक के चरणों में ही मिलता है ठहराव

 

Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी


“गुरु” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं

खुद जहा है वही पर रहते हैं

पर दूसरों को उनकीं मंजिल तक पहुंचा ही देते हैं

 


शिक्षक के बिन ये दुनिया क्या

कुछ भी नहीं बस अंधकार यहाँ

शत-शत नमन उन शिक्षकों को

जिनके कारण रोशन सारा जहाँ

 


धुल थे हम सभी आसमां बन गये

चाँद का नूर ले कहकंशा बन गये

ऐसे सर को भला कैसे कर दे विदा

जिनकी शिक्षा से हम क्या से क्या बन गये

 


Final words:- नमस्कर दोस्तों आप सबको हमारी पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद हमारी  Guru Shayari, Guru Bhakti Shayari,  शिक्षक पर शायरी अच्छी लगे तो शेयर करना ना भूले इसी तरह की अच्छी अच्छी Post पाने के लिए हमारी वेबसाइट www.akadstatus.com  से जुड़े रह